64 योगिनियों का तंत्र ,क्या है इनकी ताकत

नई दिल्ली । बचपन से नाम सुना था जैन दादा मंदिर का लेकिन कभी अंदर नहीं गया। दिल्ली के मेहरौली इलाके में करीब करीब एक हज़ार साल पहले का जैन मंदिर है जहाँ मेहरौली के राजा मदनपाल ने सिद्ध जैन मुनि मणिधारी जीन सूरी जी को आदर सहित ठहराया था और उनके स्वर्गवास पर उनकी चिता भी यही पर जलाई थी। सो एक दिन न जाने क्यों इस मंदिर ने मुझे आकर्षित किया।  बेहद खूबसूरत और अत्यंत शांत मंदिर है ये।  अंदर गया तो एक स्तम्भ ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया।  उस स्तम्भ में चारों तरफ कुछ ख़ास देवियों की मूर्तियां लगीं थीं।  जैन मंदिर में देवियों की मूर्ति कुछ मुझे अटपटी से लगीं और जानने की इच्छा प्रबल हुयी।  मंदिर के पुजारी को  बहुत कुछ तो पता नहीं था लेकिन उसने कहा ये 64 योगिनियां हैं।  हिन्दू पुराणों में हमेशा 64 योगिनोयों का जिक्र रहा है लेकिन इनके बहुत से मंदिर पूरे भारत में फैले हुए हैं।  मध्य प्रदेश और ओडिशा में 64 योगिनियों की पूजा के वृतांत और उनके मंदिर हमेशा से कौतुहल का केंद्र रहे हैं  क्योंकि ये मंदिर आम मंदिर नहीं होते और न ही आम मंदिरों में इनसे स्थापित किया जाता है।

मेहरौली के विषय में जानकारी ये मिली कि श्री कृष्ण की बहन श्री योगमाया जी का यहाँ मंदिर है जो कि महाभारत काल से ही है।  पांडवों ने दिल्ली में कुछ ख़ास मंदिर  बनवाये थे  जिनमे से कालका मंदिर, हनुमान मंदिर और योगमाया मंदिर शामिल हैं।  कहा जाता है की इंद्रप्रस्थ जो कि उनकी राजधानी थी उसके बाहर के इलाके को योगिनीपुर कहा जाता था।  मौर्यन सभ्यता के एक राजा ने योगिनीपुर बसाया था।   दरसल योगिनियां महाकाली के अभिन्न अंग है जिन्हे तंत्र सिद्धि के लिए पूजा जाता रहा है।  पुराने ज़माने से राजा इनकी आराधना से अलौकिक ताकतों को जगाने का काम किया करते थे।  राज्य का विस्तार, पांच इन्द्रियों पर विजय, असीम दौलत, स्वस्थ्य, और दूसरों को बर्बाद करने की क्षमता।  यानी जो एक जीवनकाल में किसी भी व्यक्ति की चाहत हो सकती है उसे इन 64 योगिनियों को प्रसन्न करने कर हांसिल किया जा सकता है।

64 योगिनियों को प्रसन्न करने के मार्ग को कुआला मार्ग भी कहते हैं और इनके ज़्यादातर तांत्रिक असम के कामाख्या मंदिर में देखे जा सकते हैं और ये सभी शक्ति के उपासक होते हैं।  इसी विधि में भैरव को प्रसन्न करने  लिए ये लोग मांस, मदिरा, मछली, मुद्रा का प्रयोग करते हैं।  हिन्दू और बुद्ध धर्म के लोग 64 योगिनियों को प्रसन्न करने के खेल खेलते आये हैं।  क्योंकि काली और दुर्गा ही इन 64 शक्तियों की मालकिन हैं और तमाम शक्तियां इन्ही से अर्जित की जा सकतीं हैं ऐसा तंत्र में लिखा है।

वैसे मेहरौली को तो योगिनीपुर कहा जा ही था और यहाँ सूफी और दरवेशों ने भी तंत्र के खेल खेले हैं।  मेहरौली  के अलावा ओडिशा, मध्य प्रदेश के हीरापुर, उत्तर प्रदेश और तमिल नाडु में 64 योगिनियों के मंदिर ढूंढे गए हैं।  यहाँ तक की एडवर्ड लुट्येन्स ने जब ब्रिटिश के लिए नयी दिल्ली को डिज़ाइन कर रहा था तो उनसे लुट्येन्स जोन को काबलाः के आधार पर बनाया जोकि इजराइल की सबसे ताकतवर तंत्र विद्या पर आधारित है  और मौजूदा संसद का तो डिज़ाइन चौसंठ योगिनी मंदिर मोरेना के शिव मंदिर पर आधारित है।  यानी कहीं न कहीं एडवर्ड लुट्येन्स तंत्र के इस खेल को बखूबी जानता था।

 

गंगा, यमुना,  तारा,महामाया,  वैष्णवी, सरस्वती, काली, ज्वाला मुखी, यक्षिणी, महालक्ष्मी, विराजा, कालरात्रि, चामुंडा, नारायणी, सूर्य पुत्री, नर्मदा, भद्रकाली, सर्व मंगला कुछ ऐसे नाम हो जो 64 योगिनियों की सूची में आते हैं।  वैसे भारत के अलावा नेपाल और तिब्बत में योगिनियों को सिद्ध किया जाता रहा है।  आज भी इन्ही जगहों पर इनकी साधनायें की जातीं हैं लेकिन अब इनका कौतुहल पश्चिम जगत को भी अपना दीवाना बना रहा है।  बहुत बड़ी संख्या में विदेशी इन 64 योगिनियों पर रिसर्च भी कर रहे हैं।

 

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