हनुमान मंदिर में क्या हुआ राजीव गाँधी के साथ

नई दिल्ली। सुबह 11 बजे का वक़्त था और नारायण बाबा कश्मीरी गेट मंदिर पर आरती पूरी कर चुके थे। ठण्ड का वक़्त था सो सोचा आज नीम करोली बाबा को धूप में बैठ कर रामायण सुनाऊंगा। महाराज जी के समाधि लेने के पश्चात भी नारायण बाबा हर रोज उन्हें हनुमान चालीसा या रामायण सुनाते हैं। उनका ये तय कार्यक्रम है जो लगातार चलता है। वो दिन भी आम दिनों जैसा ही था बस फर्क ये था कि भारत के प्रधानमंत्री राजीव गाँधी यमुना के दौरे पर थे। अपने लाव लश्कर के साथ प्रधानमंत्री ये देखने निकले कि आखिर यमुना किनारे कितने लोगों ने ज़मीनों पर कब्ज़ा किया हुआ है और कितने मंदिर अवैध बने हैं। जाहिर है कि इस शृंख्ला में बिरला जी द्वारा बनाये गए हनुमान मंदिर का भी नंबर आना था।

लेकिन, इन सबकी परवाह किये बगैर नारायण बाबा 11:30 बजे रामायण पाठ की तैयारी में जुटे थे। समय पर उन्होंने अपने गुरु बाबा नीम करोली जी महाराज को रामायण पढ़कर सुनाने का काम शुरू कर दिया। उधर तब के प्रधानमंत्री तिब्बती मोनेस्ट्री में लोगों से बात कर रहे थे। मोनेस्ट्री के बिलकुल बगल में ही हनुमान जी का वो मंदिर है जहाँ हनुमान जी के मूर्ति को नीम करोली बाबा ने खोदकर निकलवाया था और जुगल किशोर बिरला जी से कहकर एक भव्य मंदिर भी बनवाया था। लेकिन कहा कि जिसे हनुमान जी प्यार करेंगे उसे यहाँ खुद बुला लेंगे। हनुमान जी सोये हुए थे सो उनकी नींद अब भी खराब न की जाये।

राजीव गाँधी अपने कैबिनेट सेक्रेटरी और इलाके के सांसद के साथ मोनेस्ट्री से हनुमान मंदिर की और बढे। नारायण बाबा मंदिर की दहलीज पर बैठकर रामायण का मास परायण में मग्न थे। इससे पहले की नारायण बाबा से पूछताछ हो राजीव गाँधी ने पूरी जगह का ठीक से निरीक्षण किया। देखा कि एक बड़ा मंदिर है – कुछ गायें हैं – एक छोटा सा मकान है जिसमें एक परिवार रहता है। कैबिनेट सेक्रेटरी ने नारायण बाबा से कहा कि प्रधानमंत्री राजीव गाँधी आपसे बात करना चाहते हैं। रामायण पाठ रोक कर उन्हें पूछा बोलिये मुझसे प्रधानमंत्री को क्या काम है। राजीव बोले कि ये ज़मीन किसकी है क्या ये मंदिर अवैध ज़मीन पर बना है। नारायण बाबा ने कहा कि ये मंदिर जुगल किशोर बिरला जी ने ज़मीन खरीद कर बनवाया है आप चाहें तो कागजात देखा सकता हूँ। ये कहकर बाबा ने गुरु माँ से मंदिर के कागजात लाने को  कहा। कागज़ एकदम सही थे। मंदिर वैध ज़मीन पर बना था। राजीव गाँधी ने नारायण बाबा से पुछा कि आपका घर बार कैसे चलता है। बाबा बोले की गायों का दूध काफी रहता है और कभी कभार हनुमान जी दूसरे भोजन की व्यस्था भी कर देते हैं।

नारायण बाबा ने कहा कि मैं तो सिर्फ मंदिर हूँ और मेरा कोई बैंक अकाउंट भी नहीं है। सुनकर प्रधानमंत्री को धक्का सा लगा और उन्होंने कहा कि आप पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिनका बैंक अकाउंट नहीं है मैंने आज से पहले कभी ऐसा कोई व्यक्ति नहीं देखा। राजीव ने नारायण बाबा से पूछा कि आपका गुरु कौन है और कौन आपके लिए भोजन पानी और बाकी चीज़ों की व्यवस्था करता है। बाबा बोले मेरे बाप जी नीम करोली बाबा जो आपके नाना के भी बाप थे और कितनी ही बार उन्होंने उन्हें और आपकी माँ को मुश्किलों से निकाला। वो ही मेरे लिए सब कुछ करते हैं। सुनकर राजीव थोड़े चौंके लेकिन शायद वो भी नीम करोली बाबा के नाम से वाकिफ थे। अंत में नारायण बाबा से बोले बाबा मैं क्या कर सकता हूँ आपके लिए। बाबा ने सरल और मीठी आवाज में कहा कि मेरे गुरु रामायण पाठ सुनने का इंतज़ार कर रहे हैं आप बस रुकावट न बनें। राजीव समझ गए और वहां से चले गए।

 

बाद में लोगों और परिवार ने कहा कि जब प्रधानमंत्री कुछ दे रहा था तो आपको कुछ कह देना चाहिए था। बाबा ने कहा ये सब बापजी से मांगते आये हैं और अगर कुछ माँगना है तो नीम करोली बाबा से मागूंगा इंसानों के आगे हाथ फ़ैलाने को मेरे गुरु ने मना किया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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