‘प्रेम’ ने सिखाई जंगल में प्रेम की भाषा

नई दिल्ली ।  सुबह के चार बजे थे मैं संजय वन में गहरा पहुँच चुका था।  गहन अँधेरा और गहरा जंगल।  बचपन से कहानियां सुनी थीं कि पृथ्वीराज चौहान के बच्चे आज भी संजय वन में चीखते चिल्लाते हैं।  पृथ्वीराज चौहान दिल्ली का शासक था और मोहम्मद घोरी से 17 वी लड़ाई में हारा था।  उसके बच्चे लालकोट से भागकर संजय वन में छिप गए थे और वहीँ भूखे प्यासे उनकी मौत हो गयी थी।  सुनते हैं कि आज भी उनकी चीखें सुनाई पड़ती हैं।  वहीँ कुछ कब्रों का भी गहरा रहस्य हैं यहाँ।  माहौल इतना खतनाक बन चुका था कि मैं खुद थोड़ा थोड़ा डर रहा था और  मॉर्निंग वाक करता जा रहा था।  भागने की कहीं कोई गुंजाइश नहीं थी।

धीरे धीरे एक आकृति मेरी  तरफ बढ़ती दिखाई पड़ रही थी।  डर लगने लगा कि आखिर अँधेरे को चीरता ये कौन है ? दिल की धड़कने तेज हो गयीं – साँसे तेज हो गयीं कि क्या आज ही एक रूह से मुलाकात है क्या ? अभी भागने की सोच ही रहा  और मन में ये कयास भी थे कि क्या आज कुछ अजीबो गरीब होने वाला है।  सवाल मन में गूंज ही रहे थे कि एक लम्बी दाढ़ी और सफ़ेद बाल और एक झोला लिए एक साधु सामने आ खड़ा हुआ।  पहली नज़र में यकीन आना मुश्किल था लेकिन उन्होंने कहा अलख निरंजन।  ये दो शब्द सुनकर कुछ राहत लगी।  पाँव छुए और कहा बाबा आप मुश्किल घड़ी में भगवान बनकर आये हो।

बाबा का नाम प्रेम गिरी था।  मैं उनके साथ साथ हो चला।  वो एक समाधि पर जा रुके।  पहले झाड़ू लगायी और फिर वहां दिया जलाया।  उसके बाद उन्होंने अपने झोले से चिड़ियों का दाना निकला और बहुत सारी मिठाई भी निकाली।  फिर एक बड़ा अजीबो गरीब नज़ारा देखने को मिला।  धीरे धीरे मोर – मोरनी के परिवार आने लगे।  उसके बाद तोते ही तोते और अलग अलग चिड़ियाँ वहां आने लगीं।  ऐसा लगा कि मानो बाबा प्रेम गिरी को वो जानती थी और बाबा भी उन्हें बड़े प्रेम से दाना डाल  रहे थे जैसे अपने परिवार को बुला बुलाकर खाना खिला रहे हों।

1960 में प्रेम गिरी जी का एक परिवार था लेकिन एक दुर्घटना में उनके बीवी बच्चे मर गए।  वो दुख में शराब में डूब गए।  इसका फायदा उठाकर उनके परिवार के लोगों ने उनकी ज़मीन जायदाद हड़प ली।  होश आया तो पाया कि आत्महत्या ही एक मात्र विकल्प है।  वो एक दिन मरने के लिए संजय वन आये और वहां एक तालाब में डूबना चाहते थे।  अभी विचार कर  ही रहे थे कि अचानक एक साधु जंगल से निकलकर आया और उसने हाथ थाम लिया।

वो प्रेम गिरी जी के गुरु थे।  वो प्रेमगिरि को अपने धुनें पर ले गए और भगवा पहना दिया।  बहुत दिन बाद जब  प्रेमगिरि ने शराब पीनी छोड़ दी तो उन्होंने योग के सूत्र जानने चाहे।  तो गुरु ने कहा कि  सेवा करो जंगल की।  तब से प्रेमगिरि ने पक्षियों को अपना परिवार बना लिया।  लगभग पूरे जंगल के पक्षी प्रेम गिरी को जानते हैं और उनके आने  इंतज़ार भी करते हैं।

मैंने पूछा की बाबा कि क्या तुमने कभी भूत देखे है संजय वन में।  बाबा बोले सब कुछ है भूत प्रेम जिन लेकिन सब प्रेम  के भूखे हैं और अगर प्रेम से रहा जाए तो हर कोई जीव आपको इज़्ज़त देता है।  समय लगता है और नियम से की गयी सेवा आपको एहसास दिलाती  है कि आप अकेले नहीं हो – मानो तो संसार अपना है।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *