नेचर लवर्स के लिए पैराडाइस है राजाजी नेशनल पार्क 

नई दिल्ली । कड़ाके की सर्दी थी। इतनी की दिल्ली की सर्दी को शर्म आ जाये।  ऋषिकेश के चीला रेंज में जैसे ही जीप से उतरे तो ऐसा  लगा कि सर्दी हड्डी फोड़ देगी। जल्दी से रिसोर्ट के कमरे में घुस गए और सीधे रजाई की शरण ली।  किसी ने दरवाजा खटखटाया तो गरम चाय लिए एक बच्चा खड़ा था। अदरक वाली चाय जैसे ही जिस्म में गयी तो कुछ शरीर का एहसास हुआ।  थोड़ी देर बाद पवन लकड़ियां ले आया और कमरे के अंदर फायर प्लेस में आग जला दी।  मूढ़े पर कम्बल ओढ़कर आग सेंकी तो धीरे धीरे शरीर में गर्मी आई।  कुछ ऐसा स्वागत हुआ राजाजी नेशनल पार्क में।  हम चीला रेंज गए थे जो दिल्ली से सिर्फ 200 किलोमीटर दूर है और एक छुपा हुआ हीरा है नेचर के खजाने में।

रात जैसे जैसे परवान चढ़ी – जंगल ज़िंदा सा हो गया।  जंगल लॉज के कमरे को छोड़कर हम जैसे ही बालकनी में खड़े हुए ग्रेट इंडियन हॉर्न  बिल कॉलोनी से आवाजें आ रहीं थीं।  चांदनी रात – सितारों से भरी रात में गंगा जी की आवाज आ रहीं थीं और थोड़ी दूर हाथियों का एक झुंड टहनियां तोड़ रहा था।  बीच बीच में कुछ छोटी आवाजें चिंघाड़ने की आवाजें उनकी एक झलक को बेकरार कर रही थी।

रात को गहरी नींद आयी लेकिन आँख सुबह जल्दी खुल गयी।  क्या शब्दों में लिखूं क्या एहसास था बस गूंगे का गुड़ था।  दूर पहाड़ों पर कोहरे की चादर – गंगा मैया के हरे पानी से भाप सी उठती हुई – चरों तरफ जंगल और विशालकाय वृक्ष और दूर तक फैला सन्नाटा।  शहर सच में मर चुके हैं और जीवन को फिर से जीना है तो हिमालय जाना जरुरी है।  यहाँ जीवन है – साफ़ पानी और स्वच्छ हवा।

सुबह बिना कड़क चाय के शुरू ही नहीं हो सकती।  तो पास ही एक जंगल शॉप दिखी तो मुलाकात हुयी वीरू नेगी से।  एक पिरामिड नुमा दुकान के सामने आग जल रही थी और कुछ लोग गर्मी तलाशने वहां बैठे हुए थे।  सो मैंने भी बॉन फायर का मज़ा लेना शुरू कर दिया।  और आग सेकते हुए मुलाकात हुयी एक जंगल के जानकार और गाइड वीरू नेगी से।  उन्होंने अपना पूरा जीवन एडवेंचर और नेचर  गाइड के तौर पर समर्पित किया है।

राजाजी नेशनल पार्क के चप्पे चप्पे से वाकिफ हैं।  वीरू ने बताया कि राजाजी नेशनल पार्क अपने हाथियों के लिए मशहूर है।  साथ ही तेंदुए  यहाँ आसानी से देखे जा सकते है।  हाथियों का तो आलम ये है कि चीला रेंज में तो ये सड़क तक आ जाते हैं।

लेकिन ठण्ड का वक़्त राजाजी में बर्ड वॉचिंग के लिए लाजवाब माना जाता है।  यहाँ कुल 400 से ज्यादा पक्षिओं की किस्म पायी जाती हैं इनमे से नागालैंड के द ग्रेट हॉर्न बिल को देखा जा सकता है।  फिश ईगल, ग्रेट किंगफ़िशर, वुड पैकर, और लॉन्ग टेल ब्रॉड बिल शामिल हैं।  विदेशी फोटोग्राफर बहुत बड़ी तादाद में बर्ड वाचिंग और फोटोग्रफी के लिए राजाजी नेशनल पार्क आते हैं।  वीरू के मुताबिक बर्ड फोटोग्राफी के लिए एक सेशन के 4000 रुपए लगते हैं जिसमे पार्क फीस, परमिट, जीप, गाइड और बाइनोकुलर शामिल है।  एक मौसम में तो वीरू किंग कोबरा की साइटिंग की गारंटी भी लेते हैं।

सुबह की चाय पर फैसला हुआ कि वीरू हमारा भी गाइड होगा।  सो एक जीप सफारी बुक कर ली।  चीला रेंज से जंगल की तरफ बढ़ गए – और किस्मत अच्छी रही एक एक शानदार हाथी को दूर से देखने का मौका मिला।  उसके बाद द ग्रेट इंडियन हार्नबिल को भी बेहद करीब से देखा।  DSLR कैमरा नहीं था – तो इससे मायूसी भी हुई लेकिन रोगंटे खड़े कर देने वाले नज़ारे थे राजाजी नेशनल पार्क में।

दिल्ली से आना भी आसान है यहाँ – अपनी कार से आप हरिद्वार से काली मंदिर होते हुए चीला रेंज पहुँच सकते हैं।  बस और ट्रेन भी आसानी से उपलब्ध है।  रहने के लिए फॉरेस्ट गेस्ट हाउस और होटल्स मौजूद हैं।  जब भी तीन दिन की छुट्टी हो तब राजाजी नेशनल पार्क आया जा सकता है और प्रकृति और गंगा माँ की खूबसूरती को निहारा  जा सकता है।  तीन दिन चीला में बिताने के बाद हम दिल्ली लौट आये लेकिन जल्द वापस जाना भी तय है।

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