सच्चे संत : दो करोड़ दान कर दिए

नई दिल्ली। एक तस्वीर बहुत दिन से आकर्षित कर रही थी। न जाने कहाँ से आयी थी और कुछ पता भी नहीं चल पा रहा था कि किस संत की है ये तस्वीर। लेकिन इस बार भी बाबा ब्रह्मचारी नर्मदा शंकर काम आये। मैंने तस्वीर उन्हें दिखाई और उन्होंने कहा की कि सिद्ध पुरुष सियाराम बाबा हैं। नर्मदा बाबा के मोरटक्का आश्रम से 40 किलोमीटर दूर तेलिया भट्यान्न गांव के एक वृक्ष ने नीचे रहते हैं सियाराम बाबा। सिर्फ एक लंगोट में उन्होंने अपना जीवन व्यतीत कर दिया। सर्दी, गर्मी, बसंत और बरसात सियाराम बाबा के तन पर सिर्फ यही एक कपड़ा होता है। न उन्हें गर्मी सताती है और न ठण्ड में उन्हें किसी ने कांपते देखा है।

नर्मदा शंकर बाबा बताते हैं कि उनकी उम्र करीब करीब 100 के आसपास होगी। हालाँकि कोई उनके गुरु के बारे में नहीं जानता लेकिन 10 साल उन्होंने खड़ेश्वरी सिद्धि की है। खड़ेश्वरी साधु अपने तप के दौरान सोना – जगाना या कोई भी काम खड़े खड़े ही करते है। अपनी खड़ेश्वरी साधना की दौरान एक बार नर्मदा माँ में बाढ़ आ गयी और जल स्तर इतना बढ़ गया कि पानी उनकी नाभि तक आ गया लेकिन सियाराम बाबा एक क्षण को भी हटे नहीं। डटे रहे नर्मदा में जब तक पानी का स्तर सामान्य नहीं हो गया। बाबा नर्मदा शंकर बहुत बार उनसे मिलने जाते हैं और बाबा अपने हाथ से चाय बना कर सभी साधु और सन्यासियों को पिलाते हैं।

बड़े विरले संत हैं – नर्मदा परिक्रमा करने जो भी व्यक्ति इस गांव से होकर गुजरता है उसको भोजन बाबा खुद अपने हाथ से देते हैं। आगे के रास्ते के लिए हर तीर्थ यात्री को दाल, चावल, नमक, तेल, मिर्च, कपूर और अगरबत्ती की एक पोटली बाबा सबको देते हैं। उनके मंदिर में भी जो प्रसाद आता है उसको इंसान और जानवरों में बराबर बांटते हैं। लोग नारियल का चढ़ावा लाते हैं और बाबा तभी उसे वितरित कर देते।

पूरे दिन राम नाम का जाप करते करते बस उन्हें चिंता रहती है तो बस नर्मदा माँ की परिक्रमा करने वाले लोगों की। बाबा नर्मदा शंकर कहते हैं कि इतने सरल बाबा हैं कि आप 2000 का नोट दे दो, 500  का या 100 का – आपका नाम लिखेंगे और सिर्फ 10 रुपए लेकर बाकी सारे पैसे आपको वापस कर देंगे। अर्जेंटीना और ऑस्ट्रिया से साधक जब नर्मदा शंकर बाबा से योग सीखने आये तो बाबा सभी को सियाराम बाबा से मिलवाने ले गए। वो विदेशी लोगों के दिखाना चाहते थे कि आज भी पृथ्वी पर ऐसे साधु हैं जो सनातन धर्म के सच्चे रखवाले हैं। जिन्हें माया और मोह छू भी नहीं पाया। कुछ विदेशी लोगों ने 500 रुपए दिए – बाबा ने 10 रुपए काट कर बाकी सब लौटा दिए। हैरान हुए विदेशी कि शहर की चकाचौंध से दूर एक बीहड़ गांव में संत आज भी हैं।

बाबा नर्मदा शंकर ने बेहद रोचक जानकारी दी। दरअसल सियाराम बाबा की जगह बांध डूब क्षेत्र में आती हैं और सरकार ने उन्हें 2 करोड़ 18 लाख रुपए मुआवजा दिया। सियाराम बाबा ने पूरा धन आदिवासी क्षेत्र के विकास में दान दे दिया। इलाके के विकास के साथ साथ उन्होंने एक बेहद प्राचीन नाग देवता के मंदिर की जीणोद्धार के लिए भी पैसा आवंटित किया है। आज दिल्ली मुंबई जैसे संभ्रांत और पैसे वाले लोगों की घर कोई चला जाये तो लोग ये सोचते हैं कि ये बिना कुछ खाये ही चला जाये तो बेहतर। परिवार के दिल इतने छोटे हो गए हैं कि माता पिता के लिए घर में जगह नहीं है वहीँ सियाराम बाबा हर किसी अनजाने चेहरे को खाना खिलाते हैं। पैसे के लिए जहाँ भाई का दुश्मन हैं वहीँ ने बाबा ने 2 करोड़ रुपए दान कर दिए।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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