आधुनिक तकनीक से लैस क्रिकेटर लड़ते हैं युद्ध

नई दिल्ली ।  ठण्ड का मौसम हो।  पवेलियन में टोपियां लगाएं लोग बैठे हों।  चाय और कॉफी के दौर चल रहे हों  और सामने फील्ड में क्रिकेट का एक गेम ऑन हो।  शायद ये हो सकता है जेंटलमैन गेम।  जहाँ  अपने अपने खिलाड़ियों की हौंसला अफजाई चल रही हो और दर्शक तालियों से खिलाडियों का मनोबल बढ़ा रहे हों।  लेकिन ऐसा राजे रजवाड़ों के ज़माने में हुआ करता था लेकिन अब ये एक 50 ओवर का युद्ध है।  और इस युद्ध में उतरने से पहले घंटों, दिनों, महीनों तक कोच की निगरानी  में हुनर पर धार चढ़ाई जाती है।

लेकिन अब सिर्फ कोच की नज़र से काम नहीं चलता।  अगर कॉम्पिटिटिव क्रिकेट खेलनी है तो डिजिटल युग के तौर तरीके अपनाने होंगे।  दिल्ली की आर पी क्रिकेट अकादमी ने पहली बार पिच विज़न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है।  पिच पर एक सेंसर युक्त मैट बिछाया जाता है।  दो कैमरे बैट्समैन की तरफ और दो बोलर्स की तरफ लगाए जाते हैं।  दो बड़े सेंसर्स बोलर्स एन्ड पर लग जाते हैं जोकि बोलर्स के कदमो को जांचते हैं।  पिच पर लगा मैट ये बताता है की बोल गुड लेंथ पर थी – छोटी थी या फिर थ्री क्वाटर थी।  वहीं कैमरों को एक खास सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाता है जिससे ये पता चल जाता है की बैट्समैन हर बाल पर टेक्निकली कितना बेहतर खेलता है।  उसका फुटवर्क कितना सटीक है  और बॉडी बैलेंस पर कितना काम किया गया है।

कोच अजय वर्मा के मुताबिक बैट की ग्रिप कोच तय कर सकते हैं लेकिन उस ग्रिप में बाल भर फर्क भी आ जाये तो खिलाडी मनचाहे रन नहीं सकते क्योंकि कवर ड्राइव के लिए जायेंगे और एज लग सकता है।  बैट्समैन की ज़िन्दगी एक सेकंड के 24 वे हिस्से में तय होती है।  140 किलोमीटर की रफ़्तार से गेंद आ रही हो तो बैट्समैन के माइंडसेट के अलावा एकदम सटीक टेक्नीक भी चाहिए।  बोल की स्पीड से बैट्समैन का रिदम भी मैच होना चाहिए इसीलिए डिजिटल वर्ल्ड में डिजिटल आँखें भी होनी चाहिए।

रणजी और आईपीएल प्लेयर वैभव रावल का कहना है कि सॉफ्टवेयर से नेट प्रैक्टिस में बहुत ज्यादा मदद मिलती है।  क्योंकि जो बारीक फर्क है और पकड़ में नहीं आते वो सॉफ्टवेयर पकड़ लेता है और जब आप प्रोफेशनल लेवल क्रिकेट खेलते हैं तब आपको ये पता है कि टेक्नोलॉजी भी एक तरह की कोच है।

अंडर 16 प्लेयर पार्थ कुमार जिसने इस साल 1000 रन किये हैं।  उसका कहना है कि वो पिच विज़न पर काफी खेला है यहाँ वीडियोस देखने से अपनी गलतियां बार बार देख सकते है और कोच से डिसकस कर सकते हैं।  और फिर नए और पुराने वीडियोस को मैच भी कर सकते हैं ताकि गलती सुधारी है या नहीं इसका भी पता चलता है।

आज दिल्ली वीमेन रणजी टीम में आर पी क्रिकेट अकादमी की 7 प्लेयर्स शामिल हुईं हैं।  गुरु अजय वर्मा की शिक्षा से उन्हें अपनी मंज़िल मिल गयी है लेकिन इनमे से बैट्समैन आरती धामा और ऑफ स्पिनर नेहा रजावत ने पिच विज़न पर बहुत प्रैक्टिस भी की थी।  गुरु की शिक्षा और सॉफ्टवेयर की ताकत ने उनका सिलेक्शन डोमेस्टिक क्रिकेट में करवा दिया।  अब से जब भी आप क्रिकेट देखें तो समझ लीजियेगा कि जेंटलमैन क्रिकेट नहीं खेल रहे हैं बल्कि जो लोग इस गेम को जीवन बनाने आये हैं वो टेक्नोलॉजी से भी लैस हैं।

 

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