लड़कों को मात दे रही हैं लड़कियां क्रिकेट अकादमी में

नई दिल्ली। दिल्ली के टॉप क्लब आर पी क्रिकेट अकादमी में इन दिनों क्रिकेट का माहौल एकदम अलग है।  3 बजते ही लड़के तो रोज की तरह क्रिकेट प्रैक्टिस के  लिए पहुंचते ही हैं साथ ही एक अच्छी संख्या में अब लड़कियां भी आने लगीं हैं।  कोच अजय वर्मा हर रोज की तरह अकादमी पहुंचते ही हैं लेकिन  उनका काम अब पहले से ज्यादा है।  इसी साल अजय की मेहनत की वजह से गार्गी कॉलेज ने इंटरकॉलेज चैंपियनशिप जीती और उनकी एक होकर स्टूडेंटो  को इंडियन वीमेन क्रिकेट टीम में शामिल किया गया।

दरसल पुरुषों के इस खेल में महिलाओं को कम्पटीशन के लिए तैयार करवाना आसान नहीं होता।  हालाँकि डोमेस्टिक और अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट में महिलाओं का प्रदर्शन शानदार होता है और उन्हें रेलवे और बहुत सी अलग कंपनियों में नौकरियां भी मिलतीं हैं लेकिन उससे पहले का सफर बेहद थका देने वाला होता है।

गुरु अजय वर्मा एक ख़ास स्ट्रेटेजी के तहत टीम और लड़कियों को तैयार कर रहे हैं।  लड़कियों को भी उसी कड़ी ट्रेनिंग से वो गुजार रहे हैं जिनसे वो लड़कों को गुजारते हैं।  गौरतलब है कि गुरु अजय के सिखाये हुए लगभग 40 बच्चे इंटरनेशनल, रणजी, दिलीप ट्रॉफी, देओधर ट्रॉफी, आई पी एल खेल चुके हैं या खेल रहे हैं।  ऐसे में गुरु अजय की पैनी नज़र इस बात पर पड़ी है कि दिल्ली से वो बहुत से लड़कियों को डोमेस्टिक और इंटरनेशनल क्रिकेट में भेजना चाहते हैं।  आरती एक ऐसी बल्लेबाज है जो एक टॉप आर्डर बैट्समैन के तौर पर अपना जलवा दिखा रही है।  डोमेस्टिक क्रिकेट खेल चुकी है और नेशनल क्रिकेट अकादमी भी जा चुकी है।

गुरु अजय उसकी बल्लेबाजी में रोज सुधार कर रहे हैं । बॉडी बैलेंस से लेकर टेक्निकल खामियों को सुधार रहे हैं।  वहीं नेहा राजावत एक ऐसी स्पिनर है जो किसी भी बल्लेबाज को झुला सकती है चाहे वो लड़के ही क्यों न हों।  सेंटर विकेट पर जिस जज्बे के साथ वो बॉल डालती है वो देखने लायक है।  यही नहीं कैच कितनी भी तेज हो उसे लपकना उनकी आदत है।   इस साल गुरु अजय ने इन दोनों लड़कियों को लड़कों के साथ भी टूर्नामेंट खिलाये और नतीजे लाजवाब रहे।  दोनों ने ही अपनी अपनी जगह बेहतरीन प्रदर्शन किये।  यहाँ तक की इंग्लैंड से आयी एक जूनियर टीम को भी नेहा राजावत ने अपना जलवा दिखाया।

गुरु अजय कहते हैं कि “गेम गेम है – लड़का खेले चाहे लड़की – ये हो सकता है कि लड़के ज्यादा मजबूत हों लेकिन अपने हुनर से लड़कियां उन्हें पटक सकतीं हैं ” उनके मुताबिक आरती एक अच्छी टॉप आर्डर बैट्समैन है।  अपने आगे ग्रुप में वो अच्छे अच्छे बॉलर्स को खेलती है लेकिन मुझे लगता है कि स्किल के साथ साथ ऐटिटूड और टेम्परामेंट में सुधार भी उतना ही जरुरी है।  नेहा राजावत एक टैलेंटेड और गिफ्टेड बॉलर है जिसको अपनी लिमिटेशंस का पता है और वो नपी तुली गेंद डालती है।  लड़के अकसर उस पर ज्यादा स्कोर करना चाहते है और ओवर कॉन्फिडेंस में विकेट दे बैठते हैं।  वो ये भूल जाते  हैं कि नेहा लड़की भले ही है लेकिन एक बॉलर है।  इन दोनों के अलावा और बहुत सी लड़कियां हैं जो इस वक़्त प्रैक्टिस पर हैं और कभी भी नेशनल टीम की दावेदार हो सकतीं हैं।

गुरु अजय की मुताबिक अचीवमेंट के लिए रेगुलर यानी नियम से प्रैक्टिस पर आना जरुरी है।  आप टैलेंटेड हो सकते हो लेकिन अगर रेगुलर नहीं हो तो हुनर बेकार ही जाता है क्योंकि जो रेगुलर है वो हर रोज थोड़ा थोड़ा आगे जरूर बढ़ते हैं।  उनके मुताबिक लड़कियां कुछ मामलों में लड़कों से ज्यादा सिंसयर होतीं हैं और कोच को फॉलो करतीं हैं।  उनके मुताबिक छोटे ग्रुप्स में भी अब माता पिता बच्चियों को क्रिकेट सीखने के लिए भेज रहे हैं जोकि एक शानदार ट्रेंड है।

 

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