बर्ड वॉचिंग का जुनून ऐसा छाया कि….

नई दिल्ली । दिसंबर का महीना है और उत्तर भारत में एक नशा अपने परवान पर है।  आप नशे से कहीं सिर्फ शराब को मत लीजियेगा।  नशा तो किसी भी चीज का परवान चढ़ सकता है ।  और एक बार नशा चढ़ जाए तो फिर समझिये कि ज़िन्दगी का एक बड़ा हिस्सा वो ही ले  जाता है। इन दिनों दिल्ली के मिडिल और अप्पर मिडिल क्लास लोगों पर बर्ड वाचिंग का जैसे जूनून सा है।  पेशे से इंजीनियर पंकज मोहन अपनी बेहद व्यस्त ज़िन्दगी से शनिवार और रविवार को पक्षियों  को देने की कोशिश करते हैं।  फोटोग्राफी कभी एक दबा हुआ शौक जरूर रहा होगा उनका लेकिन जब नौकरी लगी तो एहसास हुआ कि कैमरे के साथ खेला जा सकता है।  फिर सोचा कि आखिर सब्जेक्ट क्या होगा ? तो उनके ही साथ के इंजीनियरों ने सलाह दी कि बर्ड फोटोग्राफी एक विशाल  और गहरा विषय है जिसको पूरा कभी भी नहीं किया सकता।   तो दिल्ली के इन इंजीनियरों ने एक बर्ड फोटोग्राफी ग्रुप भी बनाया।  इसमें उनका साथ दिया ए के वालिया, प्रवीण टिर्की, कमल जैसे बर्ड वॉचर्स ने।

दिल्ली के इन सभी इंजीनियरों ने एक से एक लाजवाब कैमरे और 600 एम एआईएम जैसे विशालकाय लेंस खरींदे और निकल पड़े अपने जूनून की तलाश में।  पिछले पांच साल में करीब करीब देश के हर कोने से इन्होने बर्ड फोटोग्राफी की है।  लदाख, राजस्थान, जिम कॉर्बेट, भरतपुर बर्ड सेंचुरी, अंडमान निकोबार द्वीप, राजाजी नेशनल पार्क, कूर्ग, मुन्नार, पेरियार जाकर इन्होंने ज़बरदस्त फोटोग्राफी की है और आज  इनके पास  हज़ारों पक्षियों की जैसे एक लाइब्रेरी सी है।

कभी अगर पंकज मोहन से पूछो कि इस मेहनत से उन्होंने क्या पाया तो जवाब मिलेगा कि शौक बढ़ी चीज है। कुछ मिले या नहीं लेकिन खुद को ज़बरदस्त एहसास होता है एक ऐसा आनंद मिलता है जो बाजार में नहीं बिकता।

 

ऐ के वालिया कहते हैं कि जूनून को शब्दों में पिरोया नहीं जा सकता क्योंकि अगर आप किसी का पीछा कर रहे हो तो इस  चूहे बिल्ली के खेल में मज़ा बहुत आता है और ऐसा लगता है कि शिकार पर हैं।  फर्क सिर्फ इतना है कि शिकार कैमरे से होता है। बर्ड वाचिंग एक ऐसा जूनून है जहाँ लोग पक्षियों को कैमरे में कैद करने के लिए चक्कर लगाते हैं।

राजाजी नेशनल पार्क के फेमस बर्ड गाइड वीरू नेगी का कहना है कि भारत में बर्ड फोटोग्राफी का ज़बरदस्त स्कोप है यहाँ पक्षियों की इतनी प्रजातियां हैं कि गिनना मुमकिन नहीं।  वीरू के मुताबिक वैसे तो बर्ड फोटोग्राफी के लिए लोग सारा साल आते हैं लेकिन सर्दियों में उत्तर भारत के लोग ज्यादा आते हैं।

वैसे ये थोड़ा महंगा शौक भी है क्योंकि नेशनल पार्क की फीस, परमिट, गाडी की फीस, गाइड की फीस देनी पड़ती है।  उसके ऊपर नेशनल पार्क में घंटों का इंतज़ार।  क्योंकि एक परफेक्ट शॉट खींचने के लिए कीमत तो चुकानी ही पड़ती है।  सर्दियों की छुट्टियां पड़ गयीं हैं और फोटोग्राफर्स ने अपनी अपनी बुकिंग्स कर ली हैं।

 

 

 

 

 

 

 

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