दिल्ली की भागदौड़ से त्रस्त लोग ऋषिकेश में यूं पाते हैं सुकून

नई दिल्ली।  मोर तेज तेज बोल रहे थे।  दूर कहीं जंगल में चिपकर  काकड़ (हिरन) – चिल्ला रहा था।  गंगा के तेज बहने की आवाजें कान को जैसे भेद रहीं थीं।  थोड़ी थोड़ी ऑंखें खुलीं तो गंगा जी पर हल्का कोहरा था – हिमालय नज़र कम ही आ रहा था। नवंबर की ठण्ड मजबूर कर रही थी कि रजाई न छोड़ी जाए लेकिन हिमालय का जंगल बुला रहा था।सुबह के साढ़े पांच बजे थे और जय सिंह चाय लेकर कैंप के बाहर ही खड़ा था।  कैंप मैजेस्टिक के केयरटेकर महीराज ने कहा कि सर अगर ऋषिकेश आये हो और सोते रहो तो फिर क्या मजा है। उठो हिमालय बुला रहा है।  उस वक़्त हिमालय तो कम जय सिंह की चाय ज्यादा पुकार रही थी।

जैसे तैसे रजाई छोड़कर कैंप के बाहर खड़े जय सिंह से  चाय ली।  पहली चुस्की के साथ अदरक और इलाइची का स्वाद जैसे जिस्म में घुल सा गया।  दिल्ली की बेड टी और ऋषिकेश की चाय में उतना फर्क 250 किलोमीटर का सफर तय कर ही पता चलेगा।  चाय ने ठन्डे शरीर में जैसे इंस्टेंट एनर्जी फूँक दी और मैं और मेरे साथ गए करीब 15 लोग अब 8 किलोमीटर की लम्बी यात्रा के लिए तैयार थे।  ऋषिकेश से लगभग 36 किलोमीटर दूर है ब्यासी।  यहाँ बहुत से कैम्प्स हैं जो जंगलों में लगाए गए हैं ताकि जो लोग कंक्रीट की चार दीवारियों से ऊब गए हैं उन्हें नेचर के साथ रहना बेहद आकर्षित कर रहा है।

खासकर दिल्ली में यंग जनरेशन जो तेजी से काम कर हर हफ्ते कहीं आउटिंग पर जाना चाहती है उनके लिए ब्यासी, शिवपुरी कुछ ऐसी जगह हैं जोकि थ्रिल, एडवेंचर का प्रतीक बन गयीं हैं।  खेल फ्राइडे, सैटरडे और संडे का है।  तीन दिन की ट्रिपिंग इन दिनों युवाओं में ट्रेंड कर रही है।

जय सिंह ने कहा कि कोई न ज्यादा पीछे रहेगा न कोई ज्यादा जल्दी दिखायेगा।  जय सिंह आगे से लीड कर रहा था और एक शेरपा सबसे पीछे से सुरक्षा दे रहा था  और बीच में पंद्रह लोग धीरे धीरे हिमालय वॉक पर बढ़ने लगे।  जंगल घना होता जा रहा था – साँसें कम होने लगीं थीं लेकिन जो साँसे थीं वो बेहद ख़ालिश थीं।  पूरे शरीर में जैसे अमृत की तरह फ़ैल रहीं थीं।  लग रहा था मानो शहरों में हमने खुद ही कैसा जहर घोल सा दिया है और हिमालय आज भी हमको ज़िंदा रखे हुए।

थोड़ी देर आगे ही गए थे कि जय सिंह ने उत्तराखंड की सबसे सुंदर चिड़िया हिमालयन मोनल से रुबरु करवाया।  देखते ही रह गए उसे हम सब।  अब इतनी ऊपर आ गए थे कि अब कोई शोर सुनाई ही नहीं दे रहा था।  सिर्फ पेड़ों  के बीच से आती हवाएं शोर मचा रहीं थीं। बीच में नदी नाले पार करते हुए झरनों के पास सेल्फी लेते हुए 8 किलोमीटर का हिमालयन सफर किसी स्वर्ग की अनुभूति से कम नहीं था।

पांच घंटे चलने के बाद कैंप लौट आये।  ब्रेकफास्ट तैयार था।  पेट भर खाने के बाद थोड़ा आराम किया क्योंकि रिवर राफ्टिंग के लिए भी जाना था।  कैंप में नेशनल बास्केटबॉल प्लेयर नितिन काहेरा, पंकज गौतम और दिल्ली रणजी क्रिकेट टीम के धुरंधर बल्लेबाज वैभव रावल भी रिवर राफ्टिंग के लिए तैयार थे। वैभव आई पी एल खेल रहे हैं और उनको यहाँ देखकर पुरे यंगिस्तान में ज़बरदस्त क्रेज था और हमें भी उनके साथ राफ्टिंग करने का मौका मिल रहा था।  वैभव रावल के अलावा पार्थ मीडिया  वर्क्स के सीईओ सचिन कटोच भी अपने कॉल सेण्टर से कुछ वक़्त चुराकर कैंप आये हुए थे।

जूनियर बारचा फुटबॉल क्लब से आर्यन भंडारी और आर पी क्रिकेट अकादमी के ओपेरनर पार्थ कुमार, वाइल्डलाइफ  फोटोग्राफर मोहित गोयल, कॉर्पोरेटर बैंकर मंजीत यादव भी मौजूद थे।  दिल्ली में  स्ट्रॉन्ग  द  फिटनेस स्क्वाड जिम चैन के मालिक सईद  आमिर हसन अपने फिटनेस ग्रुप को लेकर आये हुए थे।  इन सब लोगों को ब्यासी में देखकर यकीन हो गया कि एडवेंचर, थ्रिल और मस्ती के पलों के लिए दिल्ली का यंग क्राउड अब ऋषिकेश आता है।

कुछ देर बाद हम सब 21 किलोमीटर लम्बी रिवर राफ्टिंग के लिए निकल पड़े।  शिवपुरी से हमें राफ्ट में चढ़ा दिया गया।  लाइफ जैकेट और हेलमेट  के साथ महीराज खुद हमारी बोट में बैठ गए।  गंगा मैया की उछलती – तेजी से आती लहरों पर अब सब  एक राफ्ट के सहारे चल रहे थे।  कभी राफ्ट ड्रिफ्ट होती तो कभी लहरों के अंदर चली जाती।  ठन्डे पानी में पूरी तरह भीग चुके थे। लेकिन पुरे ग्रुप को थ्रिल इतना ज्यादा मिल रहा था कि 21 किलोमीटर कब पूरे हो गए पता ही नहीं चला।

 

रात को कैंप दोबारा लौटे तो महीराज ने बॉन फायर का इंतज़ाम किया।  सभी लोग ठण्ड से कांप रहे थे तो आग के आस पास बैठकर सुकून मिला।  सभी ने अपने अपने प्रोफेशन से जुडी किस्से कहानियां सुनाना शुरू किया तो वक़्त जैसे गायब सा हो गया।  कुछ चाय की चुस्की ले रहे  थे तो कुछ रम से गर्मी ले रहे थे। दरसल शहर की आपा धापी में ज़िन्दगी कहीं खो सी गयी है।  ऋषिकेश की कैंपिंग एक मौका देती है युवाओं को की फ्राइडे को निकले और संडे को शाम को दिल्ली लौटकर दोबारा ड्यूटी ज्वाइन कर ले।  और तीन दिन का  ये ट्रिप सस्ता भी पड़ता है।

 

 

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