डेंगू से बचाव के तरीके जानिए

नई दिल्ली। आयुर्वेदाचार्य अंकित पंडित दिल्ली टॉप न्यूज के दर्शकों को बता रहे हैं कि कैसे डेंगू से बच सकते हैं।  

आजकल मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही डेंगू जैसे रोग अपने पैर पसारने लगते हैं , डेंगू बुखार में खून में प्लेटलेट्स की संख्या तेज़ी से कम हो जाती है जो अक्सर घातक सिद्ध होती है । खून में प्लेटलेट्स की संख्या कम होती जा रही हो तो औषधीय गुणों से भरपूर ये चार चीज़ें रोगी को दीजिए :

१.अनार का रस,

२.गेहूँ के जवारे का रस,

३.पपीते के पत्तों का रस,

४.गिलोय/अमृता/अमरबेल/सोमलता का रस।

पपीते के पेड़ के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है,उसकी ताज़ी पत्तियों का एक चम्मच रस निकाल कर मरीज़ को दिन में २ – ३ घंटे के अंतराल पर दें, एक दिन की खुराक के बाद ही ब्लड-प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ने लग जाती है, गिलोय बेल की हाथ की उँगली बराबर मोटी डंडी और करीब छह इंच लम्बा टुकड़ा लेकर के छोटे-छोटे टुकड़े करके इन्हें दो गिलास पानी में उबालें  जब पानी आधा रह जाये तो ठंडा होने पर रोगी को पिलाये l पिलाने के मात्र एक घंटे बाद ही ब्लड-प्लेटलेट्स बढ़ने शुरू हो जाएँगे l अनार का रस तथा गेहूँ के जवारे का रस नया खून बनाते हैं तथा रोगी को रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैंl अनार का रस तो आसानी से उपलब्ध हो जाता है लेकिन यदि गेहूँ के जवारे का रस ना मिले तो रोगी को सेब फल का रस भी दिया जा सकता है।

ऊपर बताए गए इलाजों में पपीते के पेड़ के पत्तों का रस सबसे जल्दी काम करता है इसके बाद गिलोय का प्रयोग असरकारक होता है l

बुखार तेज हो तो पानी की पट्टी करें व पैरासिटामोल(Paracetamol) गोली हर 4-6 घंटे बाद दें। डेंगू व अन्य प्रकार के बुखार से बचने के लिये गिलोय घनवटी की एक एक गोली दिन में दो बार दें। बारह वर्ष से कम आयु वाले बच्चों को आधी गोली सुबह शाम दें। टायफाइड बुखार से बचने के लिये महासुदर्शन घनवटी की एक एक गोली सुबह शाम दूध के साथ दें। जुलाई अगस्त सितंबर के महीनों में विशेषकर इन आयुर्वेदिक दवाओं का प्रयोग करें और नित्य शुद्ध घी व गिलोय युक्त सामग्री से यज्ञ करें।

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