ये हैं दिल्ली क्रिकेट के असली गुरू द्रोण,एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

नई दिल्ली । घड़ी में दोपहर के 2 बज कर 30 मिनट बजते हैं तो गार्गी कॉलेज के ग्राउंड में कोच अजय वर्मा की एंट्री होती है । आप अगर उन्हें देखें तो अपनी घड़ी भी सेट कर सकते हैं । पिछले 17 साल से खिलाड़ी भले ही लेट हो जाते हैं लेकिन कोच एकदम टाइम पर होते हैं क्योंकि उन्होंने अपने क्रिकेट जीवन से अनुशासन और वक़्त की कीमत समझी है और शायद यही वजह है कि उनके सीखे हुए बच्चों में तीन इंटरनेशनल, 40 रणजी और लगभग 70 स्टेट प्लेयर हैं । तभी लोग इज़्ज़त से उन्हें गुरुद्रोण के नाम से पुकारते हैं ।

उन्हें याद है कि 10 साल के रहे होंगे तब माँ को ये चिंता सताती थी कि कहीं बेटा बिगड़ न जाये । सो पिता जी से कहा कि उन्हें पढ़ाई के साथ साथ किसी और काम में लगाना जरुरी है । पिता को लगा कि अगर किसी खेल में डाला जाये तो अजय को एक दिशा मिल सकती है । सो यहाँ से शुरुआत हुयी एक प्लेयर बनने की । नेशनल स्टेडियम में कोच गुरचरण की निगरानी में खेल सीखने का दौर शरू हो गया । अजय की बैटिंग शानदार थी और वो कोच सुनीता शर्मा की आँखों में भी चढ़ गए । देखते देखते अजय अंडर 15 के स्टेट प्लेयर बन गए और लगातार 9 साल दिल्ली स्टेट क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे । क्रिकेट में कोच की सख्ती पढ़ाई में भी काम आयी और 12 वीं में अच्छे नंबर लाकर उन्होंने खालसा कॉलेज में एडमिशन लिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी क्रिकेट टीम में कप्तानी का मौका भी । इससे पहले की यूनिवर्सिटी टीम की अगुआई करते उन्हें स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की टीम में सेलेक्ट कर लिया गया ।

बतौर एक प्रोफेशनल प्लेयर कोच अजय ने भारत से लेकर इंग्लैंड तक क्रिकेट खेली है लेकिन कभी सोचा नहीं था कि कोच भी बनेगे लेकिन एक दिन एक सीनियर कोच ने ब्रिटिश स्कूल की बच्चों को क्रिकेट सिखाने के लिए कहा तो अजय को लगा कि यहाँ एक और मौका है जब वो क्रिकेट को एक दूसरी नज़र से देखेंगे । 17 साल पहले ब्रिटिश स्कूल में ली गई एक क्लास ने उनका जीवन पलट दिया और वो धीरे धीरे प्लेयर अजय से कोच अजय बन गए । 17 साल के इस लम्बे दौर में उन्होंने खुद की निजी ज़िन्दगी को जैसे पीछे कर दिया और अपनी अकादमी के बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समय देते रहे हैं । दिल्ली के गार्गी कॉलेज की आरपीसीए आज राज्य के टॉप 10 क्लब्स में से एक है । घड़ी से ढाई बजे ग्राउंड पर होते हैं और 8 बजे घर के लिए निकलते है। ऐसे में वो सिर्फ अपने उन स्टूडेंट्स को एक प्लेयर बनने की जबर्दरस्त ट्रेनिंग देते हैं । दौड़ लगाना, नयी ट्रेनिंग्स, नेट्स, बॉलिंग, स्ट्रेचिंग, और अनुशासन ये हैं गुरु अजय वर्मा की रोज की कवायद । कहते हैं कि अगर कुंदन बनाना है तो आग से तपना ही होगा। लोहा बिना आग में जाए आकर नहीं ले सकता और इस कठिन ट्रेनिंग का नतीजा है कि आज पवन नेगी गरीबी से उठकर इंटरनेशनल क्रिकेटर बने और आईपीएल में लगातार खेल रहे हैं । ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरु अजय ने पवन नेगी की फीस तक माफ़ की थी । पवन नेगी के अलावा सोनी यादव और लतिका कुमारी विमेंस क्रिकेट में इंटरनेशनल प्लेयर बन चुकीं हैं । पवन नेगी, वैभव रावल, प्रथम, मिलिंद टंडन ये चार खिलाड़ी गुरु अजय के कैंप से निकलकर आईपीएल खेल रहे हैं । इससे पहले सचिन राणा क्रिकेट का एक बड़ा नाम है जिसने रणजी, दिलीप ट्रॉफी और आईपीएल में जगह बनाई । वैभव रावल लगातार शानदार खेलते हुए नेशनल टीम में अपनी जगह तलाश रहे हैं ।

रिपोर्टर : गुरु अजय कहूं या क्रिकेट का गुरु द्रोण

कोच अजय: गुरु द्रोण तो एक बड़ा नाम है । मैं केवल अपना काम लगन से करता हूँ और मुझे लगता है कि अगर मुझसे सीखकर कुछ बच्चे बढ़िया प्लेयर या बढ़िया इंसान बनते हैं तो मेरा जीवन सफल होगा । स्पोर्ट्स मैन जो होता है वो बाकी लोगों से अलग होता है । वो फिट होता है । उसका दिमाग तेज होता है । तो भले ही वो इंटरनेशनल प्लेयर न भी बन पाए तो याद रखेगा कि अच्छी ट्रेनिंग मिली और एक सफल ज़िन्दगी स्पोर्ट्स की वजह से वो जी रहा है ।

रिपोर्टर: गुरु द्रोण अपने चेलों से कब खुश होते हैं
कोच अजय:समाज में सफलता तो एक पैमाना है लेकिन मुझे लगता है कि जब एक माँ बाप अपने 10 साल के छोटे से बच्चे को मुझे सौंपते हैं तो वो बहुत कुछ मुझ से चाहते हैं और मेरी भी ज़िम्मेदारी होती है सभी की तरफ । उनमें से बहुत से बच्चों से एक लम्बा रिश्ता भी बन जाता है । खुशी तब होती है जब उनके माता पिता ये कहते हैं कि आपने इसे सही राह पर ले जा रहे हैं । गुरु की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी होती है । बच्चे घर से अलग बहुत बड़ा समय मेरे साथ बिताते है तो मैं ये देखता हूँ कि क्या वो परफ़ॉर्मर बन रहे हैं या नहीं । हालाँकि मेरे मापदंड बेहद कठिन हैं और बहुत कम बच्चे उसे छू पाते हैं लेकिन सबको साथ लेकर चलना, सबमे कॉन्फिडेंस लाना मेरा काम है ।

रिपोर्टर: क्या स्टेट कोच भी रहे है आप
कोच अजय : मैं बीसीसीआई लेवल 2 कोच हूँ और दिल्ली स्टेट की अंडर 15, 17, 19, 23 और 25 को कोचिंग दे चुका हूँ और दिल्ली का जूनियर स्टेट कोच भी रहा हूँ ।

रिपोर्टर : क्या क्रिकेट के अलावा भी किसी और खेल में दिलचस्पी है आपकी
कोच अजय: फुटबॉल मेरा पैशन है । यूरोपियन लीग्स को फॉलो करता हूँ ताकि उनकी फिटनेस लेवल को अपने प्लेयर्स में ला सकूँ क्योंकि क्रिकेट अब फिटनेस और स्टैमिना का गेम है । वो दिन गए जब आपको ढीले ढाले प्लेयर्स देखने को मिलते थे आज फिटनेस सबसे बड़ा मापदंड है इसीलिए इंटरनेशनल एरीना में फिटनेस किस स्तर पर है और उसको भारत में कैसे लाया जाये इसके लिए फुटबॉल, ओलंपिक्स को फॉलो करना जरुरी है।

रिपोर्टर: तभी आपको बच्चे गुरु द्रोण कहते हैं । उम्मीद करते हैं कि आप ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल प्लेयर्स तैयार करोगे ।

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