दिल्ली की ज़िमा का कॉल सेंटर से एक्ट्रेस तक का सफर

नई दिल्ली। यूं तो मुंबई में हजारों लोग अपने सपने लेकर पहुंचते है। लेकिन उन्में से कुछ ही लोगों के सपने सच हो पाते है, जिनमें से एक हैं ज़िंमा बारबोरा। एक मॉडल और एक्ट्रेस, जिन्होंने हार ना मानते हुए अपने सपनो को ना सिर्फ जिया है बल्कि उनको पूरा भी किया है। चलिए आपको बताते है जिमा के बारे में उनके इस सफलता के बारे में।

एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया उनके जीवन के बारे में और एक्टिंग के बारे में तो उन्होंने कहा, ‘मेरी परवरिश दिल्ली में और पढ़ाई डीपीएस नॉएडा में हुई है। इस पूरे दौर की छाप मेरी रुचियों पर पड़ी। तैराकी,  बैडमिन्टन, विदेशी भाषाएं सीखना मुझे काफी पसंद रहा है। ऐक्टिंग तो मुझे बचपन से ही करनी थी, लेकिन दिल्ली  के ही आदिल हुसैन (डेढ़ इश्किया और लाइफ़ आफ़ पाई फेम) के ऑथेल्लो का मंचन देख ऐक्टिंग करने की मेरी मंशा को बढावा मिला।‘

वहीं जब उनसे स्ट्रगल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मुझे अहसास कराया गया कि ऐक्टिंग के साथ उसका स्ट्रगल और सफर भी बेहद मुश्किल रहेगा। वैसे कौन सा  कैरियर मुश्किलों बग़ैर कटता है? अंग्रेज़ों के ज़माने में मेरे दादा असम के पहले  DIG थे और मेरे चाचा वायुसेना में एअर वाइस चीफ़ थे। मेरे पापा बिज़नैसमैन हैं। मेरे आसपास हमेशा ऐसे ईमानदार लोग रहे हैं, जिन्होंने अपने मकसद तक पहुंचने इज्जत से समझौता कभी नहीं किया। यह मेरी भी पर्सनाल्टी का हिस्सा बना है। अपने स्ट्रगल को चलाने मैंने भी कॉल सेंटर की नौकरियां और डिरेक्टरों को ऐसिस्ट किया है। दिल्ली, बैंगलुरू और गुवाहाटी से चला मेरा सफ़र अब मुंबई जाकर रुका है।‘

जब उनसे पूछा गया कि उन्हें सबसे ज्यादा किसके साथ समय बिताना पसंद है तो उन्होंने हंस कर कहा, ‘अपनों के साथ और मेरी पालतू बिल्लियों के साथ समय बिताना मुझे पसंद है। एक जानवर ही है जो बिना शर्तों के आपसे वफ़ा निभाता है।‘

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं मानती हूं कि आप जो भी करें, किसी की लाइफ़ पर उसकी छाप या चेहरे पर मुस्कान छोड़ जाए और अपने काम से मुझे यह मौक़े बारबार मिलते हैं। कुछ ऐसा कर देखें जो पहले किसी ने न किया हो। अभिनेत्री बनने का मेरा सपना मैं अपनी कोशिशों से ही पूरा कर रही हूं। मेरा सबसे हालिया काम एक प्रिंट ऐड में वर्ल्ड चैम्पियन साइना नेहवाल के साथ रहा है।‘

उन्होंने बताया, ‘न मैं फिल्मी परिवार से हूं, न ही मैं मिस इंडिया हूं, और न ही मेरे मम्मीपापा के पास रसूख या बैंक बैलन्स है। लेकिन उनकी दुआएँ, सहारा और मेरे शुभचिंतकों की खरी खरी ही मेरा सबकुछ है। मैं किसी को लेकर इनसिक्यौर या ईर्ष्यालू नहीं हूं। मुझे अपनी काबिलियत  बढ़ाकर अपना रास्ता बनाना है। मैं जानती हूं कि मेहनचा,इच्छाशक्ति और सब्र का शॉटकट नहीं होता औऱ दूसरों की चली राहें दोहराना मुझे मंज़ूर नहीं।‘

 

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