6 महीने में सिर्फ 1 लाख नई नौकरियां: रिपोर्ट

नई दिल्ली। आज के इस दौर में व्यक्ति को शांती से जीवन काटना मुश्किल हो गया है। देश में जिस तेजी से बेरोजगारी बढ़ रही है, उतनी तेजी से रोजगार के अवसर पैदा नहीं हो रहे हैं। सरकार की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 1 अप्रैल से 1 अक्टूबर के बीच की अवधि में अर्थव्यवस्था के आठ मुख्य गैर कृषि सेक्टरों मैन्युफैक्चरिंग और निर्माण से लेकर आईटीबीपीओ, शिक्षा और स्वास्थ्य सेक्टर में महज एक लाख से ज्यादा नौकरियों के नए अवसर पैदा हुए हैं।

इन आठ सेक्टरों में दो करोड़ से ज्यादा लोग कार्यरत हैं, ऐसे में महज आधी फीसदी रोजगार वृद्धि इकॉनमी के लिए सही तो नहीं मानी जा सकती है और सरकार के लिए भी यह चिंता का विषय है।

सूत्रों के मुताबिक जिस रिपोर्ट की बात हो रही है, वह तीसरी तिमाही की रोजगार रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में सरकार ने पिछले साल संशोधन किया था और नए सेक्टर्स भी इसमें शामिल किए गए थे। रिपोर्ट 10,000 से ज्यादा प्रतिष्ठानों के सैंपल साइज पर आधारित है।

गौरतलब है कि पहली रिपोर्ट को पिछले साल जारी किया गया था, जिसमें रोजगार का आधार वर्ष अप्रैल 2016 था। रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि रोजगार में वृद्धि की रफ्तार न सिर्फ बहुत दुखद है बल्कि इसमें कई विषमताओं को भी दिखाया गया है।

उदाहरण के लिए, नई 1.09 लाख नौकरियों में तीन चौथाई यानी 82,000 नई नौकरियों का अवसर सिर्फ दो सेक्टर शिक्षा और स्वास्थ्य में पैदा हुआ है। आपको बता दें कि मैन्युफैक्चरिंग को इकॉनमी के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है, जिसमें छह महीने में महज 12,000 नई नौकरियां पैदा हुई हैं यानी इस अहम सेक्टर में रोजगार वृद्धि सिर्फ 0.1 फीसदी है, जबकि बताया जाता है कि चुने गए आठ सेक्टर्स में से अकेले इस सेक्टर में करीब 50 फीसदी लोगों को नौकरियां मिलती हैं।

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