‘प्रेम’ ने सिखाई जंगल में प्रेम की भाषा

नई दिल्ली ।  सुबह के चार बजे थे मैं संजय वन में गहरा पहुँच चुका था।  गहन अँधेरा और गहरा जंगल।  बचपन से कहानियां सुनी थीं कि पृथ्वीराज चौहान के बच्चे आज भी संजय वन में चीखते चिल्लाते हैं।  पृथ्वीराज …

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